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जब आकलन सीखने का तरीका बन जाए

Writer: Samanta
Samanta
Aug 12
3 min read

Assessment को Test से क्यों नहीं जोड़ना चाहिए?

जब भी हम Assessment शब्द सुनते हैं, तो सबसे पहले हमारे मन में टेस्ट, परीक्षा और नंबरों की तस्वीर आती है। बच्चों के लिए भी Assessment का मतलब अक्सर एक ऐसा टेस्ट होता है, जिसमें गलती करने का डर रहता है।

जब भी Assessment की बात होती है, तो सबसे पहले टेस्ट और एग्जाम याद आते हैं। बच्चों को भी लगता है कि अब कॉपी-पेंसिल लेकर बैठना होगा और अगर गलती हुई, तो डाँट पड़ेगी या नंबर कम आएँगे। लेकिन हमारी कक्षा में Assessment बिल्कुल अलग तरीके से होता है। हमारा मानना है कि अगर बच्चा पहले से ही डर जाएगा, तो वह जो जानता है, उसे भी ठीक से बता नहीं पाएगा। इसलिए हम Assessment को खेल और रोज़ की गतिविधियों का हिस्सा बना देते हैं।

जैसे, अगर हमें देखना है कि बच्चों को नंबर पहचान में आ रहे हैं या नहीं, तो हम नंबर फ्लैश कार्ड लेते हैं। सभी कार्डों को उल्टा रख देते हैं और बच्चों से कहते हैं कि अपनी पसंद का एक कार्ड उठाओ। बच्चा कार्ड उठाता है, नंबर पहचानता है और ज़ोर से बोलता है। कभी हम कहते हैं कि इससे बड़ा नंबर ढूँढो, कभी छोटा नंबर और कभी उतनी चीज़ें गिनकर दिखाओ। बच्चे इसे खेल समझते हैं और पूरे मज़े से करते हैं।

भाषा में भी हम यही करते हैं। कभी चित्र दिखाकर कहानी सुनाने को कहते हैं, कभी शब्द पहचानने को कहते हैं और कभी किसी चित्र पर बात करने को कहते हैं। बच्चों को ऐसा नहीं लगता कि उनका Assessment हो रहा है। उन्हें लगता है कि वे बस एक मज़ेदार गतिविधि कर रहे हैं। सबसे मज़ेदार बात तो यह होती है कि बच्चे खुद आकर कहते हैं, "मैम, मेरा भी ले लो… मेरी भी बारी!" उन्हें अपनी बारी का इंतज़ार रहता है। यही देखकर लगता है कि Assessment डर का नहीं, बल्कि सीखने का हिस्सा बन गया है। हम सिर्फ़ यह नहीं देखते कि बच्चे ने सही जवाब दिया या गलत। हम यह भी देखते हैं कि उसने जवाब कैसे सोचा, कहाँ अटका और उसे किस जगह थोड़ी मदद की ज़रूरत है। इससे हमें समझ आता है कि अगली बार किस बच्चे के साथ किस तरह काम करना है।


कई बार हम बच्चों को जोड़ी में या छोटे समूह में भी गतिविधियाँ करवाते हैं। वहाँ भी हमें बहुत कुछ देखने को मिलता है—कौन बच्चा दूसरे की मदद कर रहा है, कौन अपनी बात अच्छे से रख पा रहा है और कौन अभी थोड़ा झिझक रहा है। यह सब भी Assessment का ही हिस्सा है। हमारा Assessment सिर्फ़ नंबर या रिपोर्ट बनाने के लिए नहीं होता। इसका मकसद यह समझना होता है कि बच्चा कहाँ तक पहुँचा है और उसे आगे कैसे सिखाया जाए। जब बच्चा बिना डर के सीखता है, तभी उसकी असली समझ सामने आती है। हमने देखा है कि जब Assessment खेल की तरह होता है, तो बच्चे ज़्यादा खुलकर भाग लेते हैं। वे गलती करने से नहीं डरते, बार-बार कोशिश करते हैं और नई चीज़ें सीखने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।


Assessment का असली उद्देश्य बच्चों को अंक देना नहीं, बल्कि उनकी सीखने की यात्रा को समझना, उनकी प्रगति को पहचानना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए सही दिशा देना है। जब Assessment खेल, जिज्ञासा और आनंद से जुड़ जाता है, तब सीखना बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव बन जाता है।


By Mohini

Samanta Team


 
 
 

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