Assessment: सीखने को समझने का एक तरीका
पहले मुझे लगता था कि आकलन का मतलब सिर्फ़ परीक्षा लेना और बच्चों को अंक देना होता है। लेकिन बच्चों के साथ काम करते-करते मुझे समझ आया कि आकलन इससे कहीं ज़्यादा है। यह बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को समझने का एक बहुत अच्छा तरीका है।
हर बच्चा अलग होता है। कोई जल्दी सीखता है, तो किसी को थोड़ा ज़्यादा समय और अभ्यास की ज़रूरत होती है। इसलिए सभी बच्चों से एक जैसी उम्मीद करना सही नहीं है। जब हम रोज़ कक्षा में बच्चों को पढ़ते, लिखते, बोलते और गतिविधियों में भाग लेते हुए देखते हैं, तभी हमें पता चलता है कि कौन-सा बच्चा कहाँ तक पहुँचा है और किसे अभी और मदद की ज़रूरत है।
मैंने यह भी महसूस किया है कि आकलन सिर्फ़ बच्चों के बारे में नहीं बताता, बल्कि यह भी बताता है कि हमारा पढ़ाने का तरीका कितना प्रभावी है। अगर कई बच्चे किसी एक चीज़ को समझ नहीं पा रहे हैं, तो हमें अपने पढ़ाने के तरीके में बदलाव करने की ज़रूरत होती है। इस तरह आकलन बच्चों के साथ-साथ शिक्षक को भी सीखने का अवसर देता है।
जब बच्चों को यह महसूस होता है कि उनका आकलन उन्हें डाँटने या सिर्फ़ अंक देने के लिए नहीं, बल्कि उनकी मदद करने के लिए किया जा रहा है, तब वे बिना डर के अपनी बात रखते हैं और सीखने में ज़्यादा रुचि लेते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
मेरे लिए आकलन का मतलब सिर्फ़ यह जानना नहीं है कि बच्चा कितना जानता है, बल्कि यह समझना है कि वह कैसे सीख रहा है और उसे आगे बढ़ाने के लिए हमें क्या करना चाहिए। मेरा मानना है कि अच्छा आकलन वही है, जो हर बच्चे की सीखने की यात्रा को समझे, उसकी छोटी-छोटी प्रगति को पहचाने और उसे आगे बढ़ने का हौसला दे।

By Swapnil
Samanta Team





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