Equity in Education- Gender, Access, Marginalized Communities.
- Samanta
- 6 days ago
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बच्चों के साथ काम करते हुए मैंने अनुभव किया है कि जब एक व्यक्ति (शिक्षक) शिक्षा में समानता की बात करते है तो बच्चों को केवल विद्यालय मे एडमिशन करवाने तक सीमित नही है बल्कि जिम्मेदारी तो नामांकन के बाद शुरू होता है। लेकिन असली चुनौती उन्हें स्कूल में बनाए रखना है। पहली या दूसरी कक्षा के छोटे बच्चे अक्सर स्कूल इसलिए नहीं छोड़ते कि वे काम कर रहे हैं, बल्कि इसलिए छोड़ते हैं क्योंकि स्कूल का माहौल उनके लिए नया और डरावना होता है। हमें स्कूल को एक ऐसी सुरक्षित और आनंददायक जगह बनाना होगा जहाँ बच्चे रोज़ खुशी-खुशी आना चाहें। मैंने यह करीब से महसूस किया है कि बच्चे को स्कूल आने के लिए प्रेरित करना जरूरी है जब तक बच्चा स्कूल मे खुद को खुश न महसूस करे और एक अच्छा माहौल न मिले तो उसको unsafe महसूस होता है और वह स्कूल आने को तैयार नही होता।
साथ ही बच्चो को जब तक उसका साथी नही मिलता स्कूल जाने के लिए या खेलने के लिए तब तक बच्चे स्कूल नही पहुँच पाते और बच्चे का मन भी नही लगता। लेकिन जब वे समूहों में एक साथ कदम मिलाते हुए स्कूल की ओर बढ़ते हैं, तो उनका डर कम होता है और माता-पिता का भरोसा भी बढ़ता है कि मेरे बच्चे के साथ और भी बच्चे हैं जो उसको safely घर तक ला सकते हैं। इसके साथ ही, जब हम जेंडर समानता की बात करते हैं, तो एक लड़की को शिक्षित करना केवल एक व्यक्ति को पढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ी की नींव को मजबूत करना है। इसके लिए हमें लगातार परिवारों के बीच जाकर जागरूकता बढ़ानी होगी। क्योकि ग्रामीण इलाको मे यह ज्यादा देख जाता है कि लड़कियों को पढाना जरूरी नही है, बड़ी होकर शादी कर दी जाएगी। यह मैंने अक्सर Community में जाकर सुना है, इसको महसूस किया है ।
शिक्षा में समानता का सही अर्थ यही है कि हम हर बच्चे को समझे उसकी फैमिली को समझें, उनकी व्यावहारिक चुनौतियों को दूर करें और कम्युनिटी के लेवल पर मिलकर प्रयास करें।


By Mohini
Samanta Team





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