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PBL IMPLEMENTATION


जून की छुट्टियां खत्म हो चुकी थी और स्कूल खुलने वाले थे। मैं इस चीज को लेकर बहुत खुश थी कि अब मैं स्कूल जाकर अपने पीबीएल पर अच्छे से काम कर पाऊंगी। ट्रेनिंग के बाद मैं समझ गई थी के बच्चो PBL के सभी एलीमेंट्स नहीं करवा पाई थी। की ट्रेनिन के बाद क्योंकि हम पहले से ही बहुत कम पीबीएल इंप्लीमेंट करवा पाए थे । इसीलिए मैं चाहती थी की मै पूरी तैयारी के साथ स्कूल जाऊ और PBL implement करू।


तो पहला दिन स्कूल का था और सभी बच्चे स्कूल नही आए थे। जो अपने आप मै एक चुनौती रही हमारे आगे। पहले दिन हमने अपनी library का दरवाजा खोला तो वहा पे बारिश से सीलन आई हुई थी जिससे पोस्टर पर काले रंग की फफूंदी लगनी शुरू हो गई थी और जाले भी काफी हो गए थे। कुछ चिरकुट भी बुक्स के पीछे अपना घर बना चुके थे। Library में धूल भी बहुत हो गई थी। यह देखकर बच्चे बड़ा उदास हुए और मैं भी क्योंकि हम सबने मिलकर library सजाई थी और जब ये सब देखा तो बहुत बुरा लगा। लेकिन अब हम सब उदास होकर सोचने लगे की अब हम library को साफ करना शुरू कर देते है जिसमे बच्चो ने मेरी पूरी मदद की और पता नही बच्चे लाइब्रेरी के काम को करने के लिए इतने खुश क्यो रहते है? और हो भी क्यों न library होती ही इतनी सुंदर और मजेदार जगह है। लेकिन ये library हमारे कॉलेज टाइम की library से बहुत जायदा अलग है क्योंकि ये सिर्फ चुपचाप बैठ कर बुक्स पढ़ने की जगह नही बल्कि बच्चो को अपनी पसंदीदा बुक्स को चुनकर पढ़ने और समझने का मौक़ा देती है। यहाँ वे बिना किसी दबाव के और सबसे मजेदार बात तो ये है की यहां आने को वो बच्चे भी उतने ही उत्सुक होते है जो हिंदी के अक्षर की भी ठीक से पहचान नही कर पाते और किताबो से उतना ही लगाव रखते है जितना की एक हिंदी पढ़ने वाला बच्चा और मेरी समझ में यह अपने आप में एक जीत है। खैर ये तो रही बात library की। अब हमने library को जितना हो सका साफ किया और पानी से फर्श को धोया और पंखा चला कर छोड़ दिया ताकि पानी सुख जाएं। अब library में तो हम शैशन नही ले सकते थे तो हमने क्लास मै ही library session लेना सही समझा और शुरू किया अपना PBL implementation। फिर एक हफ्ते मैंने अच्छे से शैशन लिए और पता चला की हरिद्वार में कंवर यात्रा शुरू होने को है जिसके लिए स्कूल में एक हफ्ते का अवकाश रहेगा।यह एक नई चुनौती मेरे सामने आ खड़ी हुई। अब पहले से ही बच्चे एक महीने की छुट्टियां बिता कर आए थे जिसके कारण उनका पढ़ाई से एक गैप बन गया था और उनकी पढ़ाई का काफी बड़ा loss हुआ था जो साफ साफ हम देख पा रहे थे। अब पूरी टीम ने सोचा की इसका क्या solution हो सकता है क्योंकि ये अवकाश सिर्फ हरिद्वार डिस्ट्रिक में है बाकी डिस्ट्रिक में बच्चा पढ़ रहा होगा। अब सोचा की हमारे बच्चे क्यों पीछे रहे पूरी टीम ने डिसाइड किया की हम कम्युनिटी में जाकर PBL implement करेंगे। अब ये planning मैने अपने स्कूल के स्टाफ मै शेयर की तो उन सब का response बहुत ही अच्छा था और अब बारी थी बच्चो की उनसे पूछना था की क्या हम स्कूल बंद होने पर कम्युनिटी में मिल कर ऐसा कुछ कर सकते है। तो बच्चे ये सुन करh बहुत खुश हुए अब चुनौती यह थी कि कम्युनिटी में हम किसके घर पे PBL implement करेंगे। तो ये problem जब बच्चो से मैंने शेयर की तो बच्चो ने मेरी problem दो मिनट में solve करदी और सब अपने अपने घर suggest करने लगे। अब मुझे बंद रास्ते खुलते दिखाई देने लगे थे। अब स्कूल के बाद में निकल पड़ी कम्युनिटी में तो मुझे बच्चो के मां बाप मिले उनसे बातें हुई तो उन्होंने बताया की बच्चो ने हमे बताया की हम अब छुट्टीयो में कम्युनिटी में ही पढ़ेंगे तो उनके पेरेंट्स ने यह बात मुझे पूछी तो मेने उन्हे इसकी जानकारी दी और वो लोग भी बहुत खुश थे। इस बात से नेहा के घर पे PBL implement के लिए हमने subha 9 बजे मिलने का फैसला लिया। अगले दिन सुबह बच्चे मेरे घर पहुंच गए और मेरे साथ कम्युनिटी में निकल पड़े और आगे चलकर देखा कुछ बच्चे मेरा इंतजार रास्ते पर कर रहे है फिर हम सब एक साथ निकले फिर नेहा के घर पर हम सब इक्कठे हुए और PBL start किया। मज़ेदार बात थी कि हम एक अलग environment में आकर पढ़ रहे थे तो गांव के लोग भी वहा पहुंचे हमे देखने की आखिर हो क्या रहा है? फिर हमने अपना PBL implement का पहला दिन कंप्लीट किया और फिर सब ने चिप्स खाए और सब अपने अपने घर चले गए। लेकिन हमे ये नही मालूम था की चुनौतिया अभी कम नही हुई है फिर अगले दिन से बहुत बारिश होने के कारण हम कम्युनिटी में नही जा पाए। जिससे हम बहुत निराश थे और उस हफ्ते बारिश रुकी ही नही चारो तरफ पानी ही पानी हो गया। कुछ लोगो के घरों में पानी घुस गया जिसके कारण लोगो को बहुत मुसीबतों का सामना करना पड़ा जिनमे से कुछ बच्चे हमारे स्कूल के भी थे। तो फिर हम कम्युनिटी में बच्चो का हाल चाल पूछने निकल पड़े। फिर लोगो से बात हुई तो उन्होंने बताया की बारिश का पानी उनके घरों घुसा है जिससे उनको काफी नुकसान हुआ है। फिर कुछ दिन में school खुल गए और इस बार library पहले से जायदा बुरे हाल में थी। फिर बच्चो को स्कूल आने में दिक्कत आई बारिश के चलते कुछ कुछ दिन तो पूरा school ही खाली रहने लगा क्योंकि बारिश बहुत जायदा थी। जुलाई के इस महीने बारिश हुई जिसके कारण हम properly PBL implement नही कर पाए। फिर कुछ दिन भारी बारिश के कारण छुट्टी भी हो जा रही थी। लेकिन तब भी कुछ बच्चे स्कूल आ रहे थे जो अपने आप में बहुत अच्छी बात थी और फिर अंत में हम कम्युनिटी में गए और जायदा बारिश के कारण होने वाली बीमारियों से लोगो को कैसे बचे इसपर चर्चा की तो इस महीने कम्युनिटी से मिलना बहुत जायदा हुआ जिससे हम उनसे एक कनेक्शन बना पाए और जितना हो सका हमने मिलकर PBL implement किया। अब क्योंकि मैं समानता की fellow के साथ साथ M.SC स्टूडेंट भी हूँ और मेरे exam की डेटशीट अगायी थी। मुझे इस महीने दो दिन की लीव लेनी पड़ी जिसके कारण हम PBL implement के लिए और लेट होते गए। इस महीने मेरी काफी अच्छी learning रही PBL implement को लेके community connections को लेके और problem को solution की तरफ लेके कैसे जाए। ये मैंने बखूबी सीखा।


By Meenakshi

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